कविः कालिदासस्य प्रसिद्धतम रचना कुमारसंभवम् अस्ति। एतत् काव्यम् शिवस्य प्रसूतम् कथां वर्णयते, यद्यपि वयं भगवान् शिव शिवा अनुग्रहितः जातः । प्राचीन कथा आधारितम् एतत् काव्यम् शैव मार्गा इव दिखाती । कठिन भाषायां लिखिता अपि, एतत् काव्यम् महत् सुन्दरम् अस्ति, एतत् शास्त्रार्थं प्रस्फुटनं करोति ।
कुमारसंभवम् - कालिदासस्य शीर्ष कृति
प्रसिद्धौ संस्कृतसाहित्याम् कुमारसंभवम्, महाकवि कालिदासस्य अनोक्ति कृति अस्ति। इयं काव्ये दैविकी प्रसन्नजनक कथा वर्णनं उपदर्शयति। शैवचे उत्पत्ति शशंसेखम् देखितुं होयन्तिकाचे परिश्रमाणि वर्णितः अस्ति, यत् भवति अति रोमांचक। कालिदासस्य भाषा अत्यन्त सुखद भवति। एतत्र प्रकृति च भक्ति उदाहरणात्मकम् वर्णयति।
कालिदासस्य निर्मितम् कुमारसंभवम् - परीक्षणम्
अद्वितीयता एवं अनुभूयत्व भरितम् कालिदासकृते कुमारसंभवम्, महाकवि कालिदासेन रचितम् एक अद्भुत काव्य होयति| यह देवकी एवं नन्दगोप के पुत्र बालक कृष्ण के जन्म एवं प्रस्फुटन की दिव्य गाथा वर्णयति| काव्यम् पारमार्मिक भावना एवं वैदिक अनुभव का समन्वय दर्शयति, तथाच भारतीय संस्कृति एवं कला की अभिजात परंपरा को साधना करता | कथा, शक्ति, एवं भक्ति के विषय में कालिदास ने अत्यंत सुन्दर एवं गहन दृष्टि प्रदान कीया | भाषा की मधुरता, छंद की लय, एवं शैली की विशिष्टता – ये सभी कुमारसंभवम् को साहित्य के अमर रत्न में गणित करतीं| अतः, अनुरागी पाठक एवं शास्त्रार्थ पारंगत विद्वान, उभय ही इस काव्यम् से अत्यंत आनन्दित होयतु||
कुमारसंभवम् - कथावस्तु एवं पात्रम्कुमारसंभव - कहानी एवं पात्र
कुमारसंभवम्, महाकवि भारवी लेखित एक अद्भुत काव्य है, जो भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन की दिव्य कथा को बताता है। कहानी मुख्यतः वाण के रूप में शम्भु के क्रोध से परेशान कुमार की विनाशकारी यात्रा और देवी के ज्ञान से उसके मुक्ति की ओर ले जाती है। हेतु अनेक हैं, जिनमें अनेक देवताओं, राक्षसों और मनुष्य शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक काव्य में अति आवश्यक भूमिका निभाता है। मुख्य पात्रों में कुमार, शakti, शिव, ब्रह्मा और वैकुण्ठ शामिल हैं। कथा प्रेम और सामर्थ्य के अद्भुत मिश्रण के साथ होने का अनुभव देती है।
कुमारसंभवम् - काव्य splendour
कुमारसंभवम् कृतिः भरवी द्वारा एक अद्वितीय कृति है। इसकी शैली अद्वितीय है, जो देवनागरी साहित्य में अनेक नया दशक जोड़ती है। सुगम भाषा में गहन भावों को व्यक्त करने की इसकी क्षमता चमत्कारिक है। अनेक विचार कुमारसंभवम् की काव्यात्मक उत्कृष्टता पर प्रकाश डालते हैं, जिसके प्रतिमा और विविध काव्य रचना उपयोग किए गए हैं। यह अतः काव्य विज्ञान का एक प्रतिमान है, जो पीढ़ियों से पाठकों को आकर्षित कर रहा है। इस हर पंक्ति में अनुभूति की अविचलता हमें अद्भुत अनुभव देती है।
विख्यात कालिदासोf कुमारसंभव - भावार्थः
विख्यात कालिदासोf कुमारasambhavam एक उत्कृष्टम् दिव्य कथा है। अत्र देवराज शक्र द्वारा वन में संहारम् करने पर, शिवा के आकृति में कुमार कुमार के उत्पत्ति की कथा है। यह कविता देवि के आभ्रमुखा रूप को स्पष्ट here करने का अधिकार है, क्योंकि वह ज्वाला में उत्पादन को भानु करने के तत्पश्चात् व्यवस्था लाने के उद्देश्य से अवेक्षित हुई थी। फिर कुमारasambhavam प्रेम और आदर के मनोभावों से परिपूर्ण है। अनूठी दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए, यह अमर विचार को स्पष्ट करती है।